Thursday, February 28, 2019

जल की समस्या

धरा पे जो है अमूल्य निधी,
सम्पूर्ण जीवन की क्रियाविधी,
अमृत के जैसा गुण उसका,
शीतल , निर्मल स्वभाव उसका,
जग में विस्तारण है ऐसे,
चादर विस्तर को ढके जैसे,
निर्मल,शीतल और शुद्ध जल,
बढ़ाता जीवन में बुद्धि बल,
संसार गया आधुनिकता में,
औद्योगिकता अब व्याप्त हुई,
संसार के वासी भूल गए,
जल बदल रहा निर्ममता में,
अमृत को विष में बदल रहे,
अब भी गलती न समझ रहे,
जो बचा हुआ पीने का जल,
उसको वो बहा रहे पल - पल,
अनभिज्ञ नहीं परिणाम से हैं,
फिर भी बर्बाद कर रहे जल,
जल ही जीवन है कहते सब,
पर उसी को अशुद्ध कर रहे अब।

                   -  अनुराधा यादव

Wednesday, February 27, 2019

वीर अभिनंदन

जांबाज खड़ा सीना ताने,
मन में बस एक ही जिद ठाने,
पग भारत में न धरने दूंगा,
घुसने से पहले भारत में,
दम दुश्मन का मैं ले लूंगा,
मन में प्रतिशोध की ज्वाल लिए,
और होश से उसने वार किए,
और मार गिराया दुश्मन को,
भारत माँ के जयकार किये,
फौलादी जिस्म उस वीर का है,
जिसमें अगम्य वास ज़ीर का है,
आँखों में दृढ़ता भरी हुई,
हाथों में वास शमशीर का है,
उस वीर को नमन और वंदन है,
वो भारत माँ का वीर सपूत अभिनंदन है।

                            -अनुराधा यादव

Tuesday, February 26, 2019

शौर्य वीर जवानों का

निशा शांत और देख रही,
जाग रहे भारत के प्रहरी,
तीसरा पहर बीतने को था,
सब ओर शान्ति का मंजर था,
भारत के बेटे देशभक्त,
न्योछावर जिनका हर बूँद रक्त,
घुस गए पाक की सीमा में,
जब तक तो पाक संभल पाता,
सकुशल लौटे निज सीमा में,
बदला है लिया शहादत का,
फल मिला देश को इबादत का,
नभ सेना के वीर जवानों ने,
अपना ये शौर्य दिखाया है
आतंकवाद का 12 वें दिन,
त्रियोदशी संस्कार कराया है,
बारूद परोसा भोजन में,
और धुँआ उन्हें तो पिलाया है,
केवल नभ सेना के वीरों ने,
ओ पाक! तुझे नेस्तनाबूद किया,
गर जल थल नभ की शक्ति मिल जाये,
समझना तुझे बरबाद किया,
आतंकवाद के आकाओं,
देख ली शक्ति की झाँकी है,
अभी भारत के वीरों में,
जल थल का पराक्रम वांकी है।

                     - अनुराधा यादव

पुनर्निर्माण भारत का

पैर रखा आधुनिकता में,
अब खड़ा होना है हमें,

जरूरत पूरी कर सकें,
आत्मनिर्भर बनना है हमें,

यदि देश को आगे बढ़ाना,
तो साथ चलना है हमें,

अखण्डता बचानी देश की,
तो समन्वय रखना है हमें,

देशभक्ति सदभावना की,
ज्योति जलाना है हमें,

उस ज्योतिपुंज के तेज से,
रूढ़ियाँ मिटाना है हमें,

संस्कृति हमारे देश की,
फिर से लौटाना है हमें,

भारत को फिर से विश्व का,
गुरुवर बनाना है हमें।

              -अनुराधा यादव

Sunday, February 24, 2019

माता पिता

हर मुमकिन प्रयास से,
तेरा सँवारते संसार हैं,

अपनी हर खुशी तुझपे,
देते निसार हैं,

वो तेरी जिंदगी में हरदम,
चाहते वृद्धि और प्रसार हैं,

कमियां हो लाख तुझमें,
फिर भी करते दुलार हैं,

उनका तो तुझसे ही,
जगसंसार है,

देखना भगवान को यदि,
रूप उनका निहार है,

माता की ममता,
अगाध और अपार है,

पिता के स्नेह का,
आकाश सा प्रसार है,

माता-पिता के चरणों में,
स्वर्ग का विस्तार है,

माँ बाप का आशीष तो,
रक्षा कवच तुम्हार है।

             -अनुराधा यादव

Saturday, February 23, 2019

चंद्रमा

रोशन करता धरा निशा में,
छिटक चांदनी हर एक दिशा में,

धवल चांदनी फैलाता है,
शीतलता तब ले आता है,

आकार,रंग स्थिर नहीं उसका,
जगह एक वो कभी न रुकता,

चंद्र कलाएं दिखाकर के,
प्रदक्षिणा धरा की वो करके,

कभी पूर्ण रूप दिखलाता,
पूरी तरह कभी छिप जाता,

सूरज की है असीम कृपा,
जो मयंक चमकाता है,

वही तेज फिर पृथ्वी पर,
शीतलता बन कर आता है,

इस गुण के तो कारण ही,
शिव शीश पे चन्द्र सुशोभित है,

उसकी तो धवल चांदनी पर,
चकोर धरा का मोहित है,

राकेश , शशि, सारंग,इंदु,
द्विजराज भी इसको कहते हैं,

लेकिन भारत के बच्चे अब भी,
चंदा मामा इसको कहते हैं।

              -अनुराधा यादव

Friday, February 22, 2019

घर

मेरा जिसमें स्वर्ग समाता,
भाई, बहन,पिता और माता,
वो पावन मंदिर के जैसा,
घर मेरा जो मुझको भाता।

जीने की वो कला सिखाता,
जीवन में स्थायित्व है लाता,
पम्परायें रखे संजोकर,
घर मेरा जो मुझको भाता।

बचपन की हर याद संजोता,
जीवन की माला में पिरोता,
पूर्व जनों का ज्ञान समाये,
घर मेरा जो मुझको भाता।

मन कभी अशान्त हो जाता,
तब मन में वह शांति है लाता,
सद्भावना मुझमें लाये,
घर मेरा जो मुझको भाता।

निष्ठा,प्रेम का पाठ पढ़ाता,
जीवन में सद्मार्ग दिखाता,
माता पिता का प्रेम समाये,
घर मेरा जो मुझको भाता।

               -अनुराधा यादव