Thursday, April 11, 2019

घटा का घट

श्याम वर्ण पहना लिवास,

लगता जैसे मेहमान खास,

आवाज भयंकर लिये हुए,

तीव्र गर्जना करता है,

जब क्रोध में निकले चिंगारी,

मानो विद्युत का झटका है,

घट अति विशाल है किए हुए,

जो सहस्त्र घटों से भरे हुए,

घन का घट जब नयनों देखा,

जिसका कोई न है लेखा,

घट जीवों का बैठा जाता,

किसने तो है इसको भेजा।

                      - अनुराधा यादव

Wednesday, April 10, 2019

विद्यालय

विद्या अर्जन हो यहाँ,
सत्य दर्शन हो यहाँ,
ईमान, निष्ठा , प्रेम की,
हर वक्त वर्षा हो यहाँ,

न कोई छोटा यहाँ,
न दोष अमीरी का यहाँ,
बस एक मानव जाति की,
बात होती है यहां,

गुरु की गुरुता है यहां,
हर समस्या का हल यहाँ,
जीवन को सरलता से जीने की,
मिलती सुगम है विधि यहाँ,

मिलता है आनन्द वहाँ,
होता है विद्यालय जहाँ।

               -अनुराधा यादव

Monday, April 8, 2019

परिवर्तन

परिवर्तन शील है यह समाज,
माना सबने इसको है आज,
समाज से इस परिवर्तन ने,
दूसरों की संस्कृति अर्जन ने,
स्व संस्कृति आज भुला दी है
मानो चिर निद्रा में सबने,
संस्कृति तो कहीं सुला दी है,
कुर्ता धोती बना कोट पैंट,
खुशबू गुलाब की बन गई सेंट,
दातून बन गया टूथपेस्ट,
ऐनक पहने बनते हैं श्रेष्ठ,
चौपाल तो कहीं खो गई है,
बस मोबाइल में दुनियां गुम हो गई है,
सहयोग,सम्मान, सत्कार, निष्ठा,
सब शांत दुखी हो देख रहे,
धन,धनिक,धुनी की है प्रतिष्ठा,
जो स्वार्थ से जीवन सेक रहे,
दूध हो गया मटमैला,
घी का तो खतम हुआ खेला,
लंहगा चोली जो पहनावा,
है उसको क्या बुलावा आया,
जो चला गया समाज से है,
तन अब छोटे वस्त्रों से साजते हैं,
हिंदी हिन्द की राजभाषा,
उसका भी महत्व घट रहा है,
अंग्रेजों की अंग्रेजी का,
दिन दिन ही जोर बढ़ रहा है।

                        -अनुराधा यादव

Thursday, April 4, 2019

स्वामी विवेकानंद जी

संसार में सद्भावना का,
विवेक, विनम्र , विद्वानता का,
जल सा प्रवाह जिसने किया,
मन तृप्त निज तप से किया,
अनुभव कराया आनन्द का,
भारत माँ का लाल,
वो विवेकानंद था।

प्रतिभा का कायल जग सारा,
हिन्द का वो न्यारा सितारा,
हिन्द की तो हिन्दवी को,
अपनी पूरी जिंदगी को,
रस्ता दिखाया उन्नति और सानन्द का,
भारत माँ का लाल,
वो विवेकानन्द था।

लोकतंत्र का महापर्व

लोकतंत्र के देश में महापर्व का उत्साह,
हर एक प्रान्त और शहर में रैलियों का प्रवाह,
कोई कहता विकास होगा,
अत्याचार का विनाश होगा,
कोई तो गरीबी हटाने को,
अपनी सरकार बनाने को,
दे रहा प्रलोभन जनता को,
जाति पांति को अपना कर,
दे रहा चुनौती समता को,
हर दल के नेता आशा से,
जनता की तरफ देखते हैं,
पर शांत, आनन्दित जनमानस,
निज मन का भेद न खोलते हैं,
किसी को इसका भान नही,
परिणामों का ज्ञान नहीं,
फिर भी हर दल पहले से ही,
अपना बहुमत बतलाता है,
हर नेता इस समय दुविधा में,
अपना ये समय बिताता है।
                      -अनुराधा यादव

जाग रे

जाग रे प्राणी जगत में,
कर ले कुछ रहते वखत में,
रेत सी इस जिंदगी में,
उस खुदा की बंदिगी में,
जी ले तू इस जिंदगी को,
वरना उलझेगी नखत में,
जाग रे प्राणी जगत में।

मैं जिंदगी से दूर कर दे,
जो जिंदगी को नष्ट कर दे,
जिससे उद्गम हो क्रोध का,
काया जीर्णित हो फ़क़त में,
जाग रे प्राणी जगत में।

पालन कर तू सत्य निष्ठा प्रेम का,
हर एक व्रत और नेम का,
अच्छाई को पहचान ले,
न भूल के तू परख में,
जाग रे प्राणी जगत में,
कर ले कुछ रहते वखत में।

                  अनुराधा यादव

एक शक्ति

ब्रह्मांड के हर नियम की,
हर चीज के संयम की,
संचालक एक शक्ति है,
निराकार वो शक्ति,
कृपा कर दे तो समझो मुक्ति है।

चराचर का प्राणी कोई,
नियम भंग करता कोई,
कठोर मिलता दंड है,
निराकार वो शक्ति,
कृपा कर दे तो समझो मुक्ति है।

मान ले जिस रूप में,
साकार बनती अनुरूप में,
सच्ची तेरी यदि भक्ति है,
निराकार वो शक्ति ,
कृपा कर दे तो समझो मुक्ति है।

उसकी अपार क्षमता का,
सभी के लिए समता का,
कायल तो हर एक व्यक्ति है,
निराकार वो शक्ति ,
कृपा के दे तो समझो मुक्ति है।